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Class 9 NCERT Solutions Hindi Chapter 1 - Premchand

Premchand Exercise प्रश्न-अभ्यास

Solution 1

कांजीहौस एक प्रकार से पशुओं की जेल थी। निम्नलिखित कारणों से पशुओं की हाजिरी ली जाती होगी-

1.  पशुओं की संख्या का ठीक - ठीक पता चलने के लिए।

2.  पशुओं की सेहत की जानकारी रखने।

3.  आवारा, उत्पात मचानेवाले पशुओं को अलग रखने।

Solution 2

 छोटी बच्ची का बैलों के प्रति प्रेम उमड़ने के निम्नलिखित कारण हैं -

1.  छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। वह माँ के बिछुड़ने का दर्द जानती थी। उसे लगा कि वे भी उसी की तरह अभागे हैं और अपने मालिक से दूर हैं।

2.  छोटी बच्ची को उसकी सौतेली माँ सताती थी, यहाँ हीरा-मोती पर अत्याचार कर रहा था ।

Solution 3

इस कहानी के माध्यम से निम्नलिखित नीति विषयक मूल्य उभरकर सामने आए हैं :

1.  एकता में शक्ति होती है ।

2.  सच्चे मित्र मुसीबत के समय एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ता है ।

3.  समाज के सुखी-संपन्न लोगों को भी आज़ादी की लड़ाई में योगदान देना चाहिए।

4.  आज़ादी बहुत बड़ा मूल्य है। इसे पाने के लिए मनुष्य को बड़े-से-बड़ा कष्ट उठाने को तैयार रहना चाहिए।

Solution 4

गधे को स्वभाव के कारण मूर्खता का पर्याय समझा जाता है। उसके स्वभाव में सरलता और सहनशीलता भी देखने मिलती है। इस कहानी में लेखक ने गधे की सरलता और सहनशीलता की ओर हमारा ध्यान खींचा है। प्रेमचंद ने स्वयं कहा है - "सदगुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा। कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।" कहानी में भी उन्हों ने सीधेपन की दुर्दशा दिखलाई है, मूर्खता की नहीं।

Solution 5

दो बैलों की कथा नामक पाठ में एक नहीं अनेक घटनाएँ हैं, जिनसे पता चलता है की हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी

जैसे -

1.  दोनों बैल हल या गाड़ी में जोत दिए जाते और गरदन हिला-हिलाकर चलते, उस समय हर एक की चेष्टा होती कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गर्दन पर रहे।

2.  दिन-भर के बाद दोपहर या संध्या को दोनों खुलते तो एक-दूसरे को चाट-चूट कर अपनी थकान मिटा लिया करते, नांद में खली-भूसा पड़ जाने के बाद दोनों साथ उठते, साथ नांद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे। एक मुँह हटा लेता तो दूसरा भी हटा लेता था।

3.  मटर खाते समय मोती के पकड़े जाने पर हीरा भी वापस आ गया और दोनों ही कांजीहौस में बंदी बनाए गए ।

Solution 6

हीरा के इस कथन से यह ज्ञात होता है कि उस समय समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी नहीं थी। समाज में स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। उन्हें शारीरिक यातनाएँ दी जाती थीं। वे पुरुषों द्वारा शोषित थी। इसलिए समाज में ये नियम बनाए जाते थे कि उन्हें पुरुष समाज शारीरिक दंड न दे। हीरा और मोती भले इंसानों के प्रतीक हैं। इसलिए उनके कथन सभ्य समाज पर लागू होते हैं। असभ्य समाज में स्त्रियों की प्रताड़ना होती रहती थी। लेखक नारियों के सम्मान के पक्षधर थे। वे स्त्रियों तथा पुरुषों की समानता के पक्षधर थे।

Solution 7

पशु आदिकाल से ही मनुष्यों के साथी रहे हैं।

किसान के लिए पशु वरदान के समान है। किसान हल चलाने, बोझ ढोने, पानी खींचने तथा सवारी करने के लिए पशुओं का प्रयोग करते है। झूरी हीरा और मोती को बच्चों की तरह स्नेह करता था। वह उन्हें अपनी आँखों से दूर नहीं करना चाहता था। इससे पता चलता है कि किसान अपने पशुओं से मानवीय व्यवहार करते हैं। किसान पशुओं को घर के सदस्य की भांति प्रेम करते रहे हैं और पशु अपने स्वामी के लिए जी-जान देने को तैयार रहे हैं।

Solution 8

मोती के उक्त कथन के आलोक में उसकी निम्नलिखित विशेषताएँ प्रकट होती हैं -

1.  मोती का स्वभाव उग्र होते हुए भी वह दयालु था।

2.  मोती सच्चा मित्र है। वह मुसीबत के वक्त अपने मित्र हीरा का साथ नहीं छोड़ता।

3.  मोती परोपकारी है, तभी तो वह कांजीहौस में बंद जानवरों की जान बचाता है।

4.  मोती साहसी है। वह हीरा की मदद से साँड़ को पराजित करता है।

5.  मोती अत्याचार का विरोधी है इसलिए कांजीहौस की दीवार तोड़कर विरोध प्रकट किया था।

Solution 9 - क

हीरा और मोती बिना कोई वचन कहे एक-दूसरे के मन की बात समझ जाते थे। प्रायः वे एक दूसरे से स्नेह की बातें सोचते थे। यद्दपि मनुष्य स्वयं को सब प्राणियों से श्रेष्ठ मानता है किंतु उसमें भी ये शक्ति नहीं होती कि वह दूसरों के मनोभावों को समझ सके।

Solution 9 - ख

हीरा और मोती गया के घर बंधे  हुए थे। गया ने उनके साथ अपमान पूर्ण व्यवहार किया था। इसलिए वे क्षुब्ध थे। परन्तु तभी एक नन्हीं लड़की ने आकर उन्हें एक रोटी ला दी। यद्यपि इससे हीरा-मोती की भूख कम नहीं हो सकती थी, तथापि उन्होंने बालिका के प्रेम का अनुभव कर लिया और प्रसन्न हो उठे।

Solution 10

ग.  वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुखी था।

Premchand Exercise भाषा-अध्ययन

Solution 13

 

' ही ' निपात -

1.  एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया।

2.  अवश्य ही उनमे कोई ऐसी गुप्त शक्ति था, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करनेवाला मनुष्य वंचित हैं।

3.  नाँद में खली-भूसा पड़ जाने के बाद दोनों साथ ही उठते, साथ नाँद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे।

4.  एक मूँह हटा लेता, तो दूसरा भी हटा लेता।

5.  अभी चार ही ग्रास खाये थे दो आदमी लाठियाँ लिये दौड़ पडे, और दोनो मित्रों को घेर लिया।

 

' भी ' निपात -

1.  कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर हैं, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ जाता हैं, किन्तु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना।

2.  उसके चहरे पर एक स्थायी विषाद स्थायी रूप से छाया रहता हैं। सुख-दुःख, हानि-लाभ, किसी भी दशा में बदलते नहीं देखा।

3.  चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं फिर भी बदनाम हैं।

4.  गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।

5.  झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। यहाँ मार पड़ी।

Solution 14 - क

मिश्र वाक्य

मुख्य उपवाक्य - अधमरे से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।

गौण उपवाक्य - दीवार का गिरना था।

Solution 14 - ख

मिश्र वाक्य

मुख्य उपवाक्य - सहसा एक दढियल आदमी आया।

गौण उपवाक्य - जिसकी आँखे लाल थी और मुद्रा अत्यन्त कठोर।

Solution 14 - ग

मिश्र वाक्य

मुख्य उपवाक्य - हीरा ने कहा।

गौण उपवाक्य - गया के घर से नाहक भागे।

Solution 14 - घ

मिश्र वाक्य

मुख्य उपवाक्य - तो बिकेंगे।

गौण उपवाक्य - मैं बेचूँगा।

Solution 14 - ङ

मिश्र वाक्य

मुख्य उपवाक्य - मैं बे-मारे न छोड़ता।

गौण उपवाक्य - अगर वह मुझे पकड़ता।

Solution 15

 

मुहावरा

वाक्य-प्रयोग

जी तोड़ काम करना

भारतीय किसान जी तोड़ काम करते हैं।

टाल जाना

सेठजी नौकर को मदद करने का जूठा आश्वासन देते रहें पर जरूरत पड़ने पर टाल गए।

जान से हाथ धोना

युद्ध में हजारों जवान जान से हाथ धो बैठते हैं।

नौ दो ग्यारह होना

पुलिस के आने की भनक लगते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गए।

ईंट का जवाब पत्थर से देना

भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतिद्वंद्वी टीम को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।

 

Premchand Exercise रचना-अभिव्यक्ति

Solution 11

हीरा और मोती शोषण के विरुद्ध हैं वे हर शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहे हैं उन्होंने झूरी के साले गया का विरोध किया तो सूखी रोटियाँ और डंडे खाए फिर काँजीहौस में अन्याय का विरोध किया और बंधन में पड़े मेरे विचार से उन्होंने शोषण का विरोध करके ठीक किया क्योंकि शोषित होकर जीने का क्या लाभ

शोषित को भय और यातना के सिवा कुछ प्राप्त नहीं होता

Solution 12

यह कहानी अप्रत्यक्ष रूप से आज़ादी के आंदोलन से जुडी है यह कहानी दो बैलों से सम्बंधित है। दोनों बैल संवेदनशील और क्रांतिकारी भारतीय है। दोनों मिलकर आज़ादी पाने के लिए संघर्षरत रहते हैं। ये अपने देश (झूरी के घर) से बहुत प्रेम करते हैं। उन्हें दूसरे देश में (घर में) रहना पसंद नहीं। स्वदेश जाने के लिए वे हर बाधा का डटकर सामना करते हैं। भूखे - प्यासे रहना पड़ता है, कैद में रहना पड़ता है। ये हमारे क्रांतिकारियों की लड़ाई याद दिला देते है