NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 4 - Kathputli

Chapter 4 - Kathputli Exercise प्रश्न-अभ्यास

Solution 1

कठपुतली को सदा दूसरों के इशारों पर नाचने से दुःख होता है क्योंकि उसे चारों ओर से धागों के बंधन से बाँध रखा गया था। वह इस बंधन से तंग आ गई थी। वह स्वतंत्र रहना चाहती है। अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। धागे में बंधना उसे पराधीनता लगती है इसीलिए उसे गुस्सा आता है। 

Solution 2

कठपुतली अपने पाँव पर खड़ी होना चाहती है अर्थात् पराधीनता उसे पसंद नहीं लेकिन खड़ी नहीं होती क्योंकि उसके पैरों में स्वतंत्रत रूप से खड़े होने की शक्ति नहीं है। स्वतंत्रता के लिए केवल इच्छा ही नहीं क्षमता की भी आवश्यकता होती है जो कठपुतली में नहीं है। 

Solution 3

जब पहली कठपुतली ने स्वतंत्र होने के लिए विद्रोह किया तो दूसरी कठपुतलियों को भी यह बात बहुत अच्छी लगी क्योंकि बंधन में रहना कोई पसंद नहीं करता। वे भी अपनी इच्छानुसार जीना चाहती थी। वे भी बंधन में दुखी हो चुकी थीं। 

Solution 4

कठपुतली अपने पाँव पर खड़ी होना चाहती है अर्थात् पराधीनता उसे पसंद नहीं लेकिन खड़ी नहीं होती क्योंकि जब उस पर सभी कठपुतलियों की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आती है, तो वह डर जाती है। उसे ऐसा लगता है कि कहीं उसका उठाया गया कदम सबको मुश्किल में न डाल दे और अभी उसकी उम्र भी कम है अत: उसे दूसरों के सहारे की भी जरुरत थी। साथ ही स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद उसे बनाए रखना भी तो जरुरी होता है इसलिए कथनी और करनी में अंतर होता है जिसे कठपुतली समझ चुकी थी। 

Solution 5

'बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए' पंक्ति का अर्थ यह है कि बहुत दिन हो गए मन का दुःख दूर नहीं हुआ और न मन में ख़ुशी आई।

Solution 6

1. सन् 1857 - कुँवरसिंह, तात्या टोपे

2. सन् 1942 - सुभाषचंद्र बोस, चन्द्र शेखर आज़ाद

Chapter 4 - Kathputli Exercise भाषा की बात

Solution 1

हाथ-हथ -  हथकरघा, हथकड़ी,

सोना-सोन - सोननदी, सोनभद्रा, सोनजूही

मिट्टी-मट - मटमैला, मटका 

Solution 2

पतला-दुबला 

उधर-इधर

नीचे-ऊपर

बाएँ-दाएँ

काला-गोरा

पीला-लाल