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CBSE Class 6 Saaransh Lekhan Paar Najar Ke

Paar Najar Ke Synopsis

सारांश


यह कहानी मंगल ग्रह की है। इस कहानी के छोटू की कॉलोनी मंगल ग्रह पर जमीन के नीचे बनी हुई थी। छोटू के पापा हर रोज सुरंग से अपने काम को जाते थे। आम लोगों को उस रास्ते जाने की मनाही थी।
एक दिन पापा की छुट्टी होने पर छोटू ने पापा का सिक्योरिटी-पास हथिया लिया और चल दिया सुरंग की ओर। छोटू ने पास को दरवाजे के बने खाँचे में डाला तो दरवाजा खुल गया। सुरंगनुमा रास्ता ऊपर की ओर जा रहा था। छोटू को लगा जमीन के ऊपर सफर करने का उसे मौका मिल गया परन्तु उसके पहले ही छोटू के आगे बढ़ने पर निरीक्षक यंत्रों द्वारा वह पकड़ लिया गया। निरीक्षक यंत्र ने उसकी तस्वीर ले ली और खतरे की सूचना सिपाहियों को दे दी। छोटू को पकड़कर उसके घर ले आया गया। इधर छोटू की माँ उसका इंतजार कर रही थी। आज उसकी खैरियत न थी पर पापा द्वारा उसे बचा लिया गया।
पापा ने तब छोटू को बताया कि वह जमीन के ऊपर काम करते हैं। आम आदमी वहाँ के माहौल में नहीं रह सकता है इसलिए उन्हें वहाँ जाने की इजाजत नहीं है। एक खास किस्म के स्पेस सूट को पहनकर ही ऊपर जाया जा सकता है। उस स्पेस सूट में शरीर को ऑक्सीजन मिलता है, जूते भी कुछ खास किस्म के होते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त होने पर ही वे वहाँ चल-फिर सकते हैं।
पापा ने उसे यह भी बताया कि पहले सब ग्रह वासी जमीन के ऊपर ही रहते थे वे भी बगैर किसी स्पेस सूट के परन्तु सूरज में परिवर्तन के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया। सभी पशु-पक्षी, पेड़ इसे सह नहीं पाए और धीरे-धीरे समाप्त हो गए। केवल उनके पूर्वजों ने इसका सामना किया और तकनीकी विकास से जमीन के नीचे घर बनाकर रहने लगे। धरती के ऊपर लगे विभिन्न यंत्रों द्वारा वे सूरज की रोशनी और गर्मी का इस्तेमाल करते हैं। और कुछ चुनिंदा लोग ही उन यंत्रों का ध्यान रखते हैं।
दूसरे दिन जब छोटू के पापा काम के लिए निकल रहे थे तो कम्पूटर से पता चला कि एक अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह की ओर बढ़ रहा है और उसमें से एक यांत्रिक हाथ बाहर निकल रहा है। कॉलोनी प्रबंध समिति की मीटिंग बुलाई गई। अध्यक्ष ने बताया की दो यान उनके ग्रह की ओर बढ़ रहे हैं। कॉलोनी की सुरक्षा की जिम्मेदारी नंबर 1 पर थी। उसने कहा कि उसके पास यान को समाप्त करने की क्षमता है परन्तु ऐसा करने पर उन्हें कोई जानकारी हासिल न होगी। नंबर 2 जो कि एक वैज्ञानिक थे नंबर 1 की बात से सहमत थे। उन्होंने कहा कि अगर हम यान को नष्ट करते हैं तो दूसरे ग्रहों के लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाएगी। नंबर 3 जो सामाजिक व्यवस्था का काम देखते थे उन्होंने कहा कि यदि दूसरे लोगों को हमारे बारे में पता चला तो हो सकता है कि आगे वे और भी अधिक सक्षम यंत्र भेजें। इतनी देर में उन्हें जानकारी मिली की यान धरती पर उतर चुका है।
उस दिन छोटू को उसके पापा अपने साथ कंट्रोल रूम में ले गए। पापा ने छोटू को एक कंसोल दिखाया जिस पर कई बटन थे। सब लोग स्क्रीन पर देख रहे थे परन्तु छोटू की नज़र तो उस कंसोल पर थी। छोटू ने कंसोल पर लगे लाल बटन को दबा दिया। खतरे की घंटी बजने लगी और सभी कंसोल की ओर देखने लगे। छोटू के पापा ने छोटू को एक थप्पड़ जड़ दिया और लाल बटन को पहले की तरह कर दिया। परन्तु तब तक लाल बटन ने अपना काम कर दिया था और यांत्रिक हाथ की गतिविधि रुक गई थी।
उधर नासा ने धरती पर अपना बयान जारी करते हुए कहा कि मंगल की धरती पर उतरा अंतरिक्ष यान का यांत्रिक हाथ बेकार हो गया है और उसके ठीक करने के प्रयास जारी हैं। इसके कुछ दिनों के बाद अखबारों में छपा कि रिमोट कंट्रोल से यांत्रिक हाथ को ठीक कर दिया गया है। उसने मंगल के मिट्टी के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। पृथ्वी की तरह मंगल पर भी जीव सृष्टि का अस्तित्व है पर आज भी यह एक रहस्य है।