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Lokbharti Solution for Class 9 Hindi Chapter 19 - उड़ान

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Lokbharti Solution for Class 9 Hindi Chapter 19 - उड़ान पाठ के आँगन से

Solution 1

परों में शक्ति हो तो उपलब्ध नभ को नापना है 

Solution 2

सुलगते आप बाहर से अगन नहीं माँगा करते 

Solution 3

अँधेरे की इलाके में नमन माँगा नहीं करते -

भावार्थ : उपर्युक्त पंक्तियों के द्वारा कवि यह कहना चाहते हैं कि जहाँ अँधेरा हैं वहाँ रोशनी की चाह रखना व्यर्थ है। क्योंकि वहाँ रोशनी होगी ही नहीं। उसी प्रकार जहाँ काँटों के वन हो वहाँ पर फूलों की आशा करना व्यर्थ है। 

जो व्यक्ति आदर के योग्य होता है, लोग स्वयं की उसका झुककर सम्मान करते हैं। उसे किसी को सम्मान देने के लिए मजबूर नहीं करना पड़ता है। 

Solution 4

उड़ान इस कविता द्वारा कवि ने कई मानवीय गुणों की प्रेरणा दी है। स्वाभिमान, विनम्रता, हौसला, दूरदृष्टि, परोपकार, ऊँचें लक्ष्य, अपनी गलती पर पश्चाताप करना आदि ऐसे गुण गुण हैं, जो किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में सहायक होते हैं। स्वाभिमान जहाँ व्यक्ति में आत्मविश्वास लाता है तो अपनी गलती पर पछतावा करने से आप अपनी की गई गलतियों में सुधार कर पाते हो। वही विनम्रता हमेशा ही आदर पाती है। जितना हमारा हौसला बुलंद होगा उतने ही लक्ष्य को हम प्राप्त कर पाएँगे। इस प्रकार से यह कविता मानवीय गुणों को अपनाकर अपना व्यक्तित्व विकास का संदेश देती है। 

Solution 5

कवि ने इन मानवीय गुणों की ओर संकेत किया है -

  1. आदर 
  2. शक्ति 
  3. पश्चाताप 
  4. नमन 

Solution 6

चिह्न 

नाम 

वाक्य 

, 

अल्पविराम 

राधा, रीता और रानी भी जाएगी। 

- 

योजक चिह्न 

माता-पिता का कहना मानना चाहिए। 

पूर्ण विराम

सीता अपने सामने भाई को देखकर घबरा गई।

 

Lokbharti Solution for Class 9 Hindi Chapter 19 - उड़ान कल्पना-पल्लव

Solution 1

'मैं चिड़िया बोल रही हूँ' 

पहचाना मुझे मैं चिड़िया हूँ। हाँ! वही चिड़िया जिस पर आपका ध्यान कभी नहीं जाता परंतु कुछ समय पहले तक ऐसा नहीं था। हम चिड़ियों की चहचहाहट से मनुष्य की नींद खुलती थी। हमारी चहचहाहट नए दिन की शुरुवात मानी जाती थी। कुछ वर्षों से मेरा अस्तित्व बड़े खतरे में है आधुनिकता के नाम पर गाँव क्या शहर क्या सब बदल गए हैं। पहले हमारे लिए घोंसला बनाने की जगह की कोई कमी न थी चारों और हरियाली ही हरियाली थी। दाना-पानी सब कुछ हमारे लिए सुलभ था। आज मानव के स्वार्थी स्वभाव के कारण हमारे लिए स्थान ही नहीं बचा है। मेरा केवल आप मनुष्यों से यही कहना है कि प्रकृति पर हम पंछियों का भी समान हक़ है और यह हक़ मनुष्य हमसे न छीने। 

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