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Sulabhbharti Solution for Class 7 Hindi Chapter 6 - Prithvi Se Aagni Tak

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Sulabhbharti Solution for Class 7 Hindi Chapter 6 - Prithvi Se Aagni Tak प्रश्न-अभ्यास

Solution 1

  1. पृथ्वी प्रक्षेपण के लिए श्री हरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र में विशेष सुविधाएँ स्थापित की। 
  2. सिर्फ छह सौ सेकंड्स की भव्य उड़ान ने हमारी सारी थकान को एक पल में धो डाला। 

Solution 2

अग्नि मिसाइल के सफल प्रक्षेपण ने भारत को चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में पहुँचा दिया। 

Solution 3

डॉक्टर कलाम ने टीम के साथ अपना अनुभव बाँटते हुए कहा कि उनका प्रक्षेपण यान तो समुद्र में गिर कर कहीं खो गया था फिर भी उन्होंने अपने अभियान में सफलता पाई टीम की मिसाइल तो उनके पास ही है, वे उसे अपना कुछ समय देकर सुधार सकते हैं 

Solution 4

अग्नि प्रक्षेपण के लिए बीस अप्रैल उन्नीस सौ नवासी का दिन निर्धारित किया गया था, परन्तु जिस समय प्रक्षेपण टी-14 सेकंड्स पर था उसी समय कम्पूटर ने संकेत दिया कि कोई एक उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहा है इस बाधा में सुधार भी कर लिया गया था परन्तु उसके बाद भी निचली रेंज पर रुकने के लिए कहा गया और अगले कुछ सेकंडों में जगह-जगह रुकना पड़ रहा था अत: प्रक्षेपण को स्थगित करना पड़ा 

Solution 5

सारे वैज्ञानिक अग्नि प्रक्षेपण के सफल होने के विषय में सोचते हुए खामोश बैठे हुए थे उसी समय रक्षा मंत्री ने डॉ कलामजी से पूछा कि कल वे अग्नि के कामयाबी के जश्न के रूप में उनसे क्या उपहार चाहते हैं। 

Sulabhbharti Solution for Class 7 Hindi Chapter 6 - Prithvi Se Aagni Tak भाषा की ओर

Solution 1

शब्द 

उपसर्ग 

प्रत्यय 

वाक्य 

दिन 

प्रतिदिन

दिनभर 

मैं प्रतिदिन मंदिर जाता हूँ 

घर में दिनभर से उधम मचा हुआ है 

नम्र 

विनम्र 

नम्रता 

मेरा बड़ा भाई बड़ा विनम्र है 

नम्रता मानव का गुण है 

डर 

निडर 

डरपोक 

रुचेन बड़ा ही निडर बालक है 

इतना भी डरपोकबनो 

जल 

निर्जल 

जलहीन 

कई लोग निर्जल व्रत रखते हैं 

इस बार तो यह तालाब जलहीन रह गया 

साहस 

दुसाहस 

साहसी 

पिता के सामने इतना बड़ा दुसाहस 

छोटा सा बालक तो बड़ा साहसी निकला 

सत्य 

असत्य 

सत्यवादी 

असत्य ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता। 

आजकल तुम जैसा सत्यवादी मिलना जरा मुश्किल है। 

 

Sulabhbharti Solution for Class 7 Hindi Chapter 6 - Prithvi Se Aagni Tak जरा सोचो..... चर्चा करो

Solution 1

यदि मैं अंतरिक्ष बन जाऊँ इस कल्पना मात्र से ही मन खुशी से झूम उठाअंतरिक्ष यात्री बनने की मेरी मनोकामना पूरी होते ही सबसे पहले मैं अपनी धरती को अंतरिक्ष से निहारना चाहूँगी मैं देखना चाहूँगी कि मेरी धरती ऊपर से कैसे नजर आती है धरती को निहारने के पश्चात मैं दूर अंतरिक्ष की यात्रा पर निकल जाऊँगी और नए-नए आकाशीय पिंडों की खोज करुँगी 

Sulabhbharti Solution for Class 7 Hindi Chapter 6 - Prithvi Se Aagni Tak मेरी कलम से

Solution 1

कारंजा गाँव में हर वर्ष शिवरात्रि के दिन बहुत बड़ा मेला लगता था कारंजा गाँव के अतिरिक्त आस-पास के गाँव भी इस मेले में आते थे मेले में कई प्रकार की दुकानें लगी हुई थी जैसे खिलौने, मिठाइयाँ, कपड़े और कहीं जादुई तमाशे वालों की दुकानें, साथ ही कई रोजमर्रा के जरुरत के सामानों की दुकानें 

मेले के प्रवेशद्वार के बीचो-बीच ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा हुआ था। उस पत्थर से टकराकर न जाने कितने लोग गिर रहे थे पर किसी का भी ध्यान उस पत्थर को हटाने की ओर नहीं जा रहा था। लोग गिरते अपने आप को संभालते और आगे बढ़ जाते। मेले में सोहम भी अपने माता-पिता के साथ आया था। वह बड़ी देर से लोगों का उस पत्थर से टकराना देख रहा था। सोहम से रहा न गया वह दौड़कर उस पत्थर के पास पहुँचा और अपनी सारी शक्ति लगाकर उस पत्थर को निकालने में सफल हुआ। जैसे ही सोहम ने वह पत्थर हटाया तो उसे उसके नीचे से एक चिठ्ठी और एक थैली मिली रखी मिली। उस चिठ्ठी पर लिखा था पत्थर निकालने वाले को इनाम। 

शीर्षक - निस्वार्थ सेवा 

सीख - हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि मनुष्य को बिना किसी स्वार्थ के परोपकार के कार्य करते रहना चाहिए।

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Maharashtra VII - Hindi

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