Chapter 6 : Sur Ke Pad [Poem] - Evergreen Publication Solutions for Class 9 Hindi ICSE

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Chapter 6 - Sur Ke Pad [Poem] Excercise प्रश्न-अभ्यास

Question 1

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

जसोदा हरि पालने झुलावै। 

हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥ 

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै। 

तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥ 

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। 

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥ 

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै। 

जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥ 

कौन किसको सुलाने का प्रयास कर रहा है?

Solution 1

प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने माता यशोदा का कृष्ण के प्रति प्यार को प्रदर्शित किया है। यहाँ पर माता यशोदा कृष्ण को सुलाने का प्रयास कर रही है। 

Question 2

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

जसोदा हरि पालने झुलावै। 

हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥ 

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै। 

तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥ 

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। 

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥ 

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै। 

जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥ 

यशोदा बालक कृष्ण को सुलाने के लिए क्या-क्या यत्न कर रही है?  

Solution 2

यशोदा जी बालक कृष्ण को सुलाने के लिए पलने में झुला रही हैं। कभी प्यार करके पुचकारती हैं और लोरी गाती रहती है। 

Question 3

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

जसोदा हरि पालने झुलावै। 

हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥ 

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै। 

तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥ 

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। 

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥ 

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै। 

जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥ 

कृष्ण को सोता हुआ जानकर यशोदा क्या करती हैं? 

Solution 3

कृष्ण को सोते समझकर यशोदा माता चुप हो जाती हैं और दूसरी गोपियों को भी संकेत करके समझाती हैं कि वे सब भी चुप रहे। 

Question 4

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

जसोदा हरि पालने झुलावै। 

हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥ 

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै। 

तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥ 

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। 

सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥ 

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै। 

जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥ 

सूरदास के अनुसार यशोदा कौन-सा सुख पा रही हैं? 

Solution 4

सूरदास जी कहते हैं कि जो सुख देवताओं तथा मुनियों के लिये भी दुर्लभ है, वही श्याम को बालरूप में पाकर लालन-पालन तथा प्यार करने का सुख यशोदा प्राप्त कर रही हैं। 

Question 5

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

खीजत जात माखन खात। 

अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥ 

कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात। 

कबहुँ झुक कै अलक खैँचत, नैन जल भरि जात॥ 

कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात। 

सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥ 

इस दोहे में सूरदास जी ने क्या वर्णन किया है? 

Solution 5

इस दोहे में सूरदास जी ने श्रीकृष्ण के अनुपम बाल सौन्दर्य का वर्णन किया है। 

Question 6

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

खीजत जात माखन खात। 

अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥ 

कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात। 

कबहुँ झुक कै अलक खैँचत, नैन जल भरि जात॥ 

कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात। 

सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥ 

बाल कृष्ण कैसे चलते हैं? 

Solution 6

बाल कृष्ण घुटनों के बल चलते हैं। उनके पैरों में घुंघरुओं की आवाज़ आती है। 

Question 7

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

खीजत जात माखन खात। 

अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥ 

कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात। 

कबहुँ झुक कै अलक खैँचत, नैन जल भरि जात॥ 

कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात। 

सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥ 

बाल कृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन कीजिए। 

Solution 7

बाल कृष्ण बहुत सुंदर हैं। उनके नेत्र सुंदर हैं, भौंहें टेढ़ी हैं तथा वे बार-बार जम्हाई ले रहे हैं। उनका शरीर धूल में सना है। 

Question 8

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

खीजत जात माखन खात। 

अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥ 

कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात। 

कबहुँ झुक कै अलक खैँचत, नैन जल भरि जात॥ 

कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात। 

सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥ 

बाल कृष्ण कैसी जबान में बोलते हैं? 

Solution 8

बाल कृष्ण तोतली जबान में बोलते हैं। 

Question 9

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं। 

जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥ 

सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं। 

ह्वै हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥ 

आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं। 

हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥ 

तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥ 

सूरदास ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥ 

उपर्युक्त पद का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।

Solution 9

उपर्युक्त पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। इस पद में बाल कृष्ण अपनी यशोदा माता से चंद्रमा रूपी खिलौना लेने की हठ कर रहे हैं उसका वर्णन किया गया है। 

Question 10

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं। 

जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥ 

सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं। 

ह्वै हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥ 

आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं। 

हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥ 

तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥ 

सूरदास ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥ 

अपनी हठ पूरी न होने पर बाल कृष्ण अपनी माता को क्या-क्या कह रहे हैं? 

Solution 10

अपनी हठ पूरी न होने पर बाल कृष्ण अपनी माता को कहते हैं कि जब तक उन्हें चाँद रूपी खिलौना नहीं मिल जाता तब तक वह न तो भोजन ग्रहण करेंगे, न चोटी गुँथवाएगे, न मोतियों की माला पहनेंगे, न उनकी गोद में आएँगे, न ही नंद बाबा और यशोदा माता के बेटे कहलाएँगे। 

Question 11

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं। 

जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥ 

सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं। 

ह्वै हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥ 

आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं। 

हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥ 

तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥ 

सूरदास ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥ 

यशोदा माता श्रीकृष्ण को मनाने के लिए क्या कहती है? 

Solution 11

यशोदा माता श्रीकृष्ण को मनाने के लिए उनके कान में कहती है, तुम ध्यान से सुनो। कहीं बलराम न सुन ले। तुम तो मेरे चंदा हो और में तुम्हारे लिए सुंदर दुल्हन लाऊँगी। 

Question 12

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं। 

जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥ 

सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं। 

ह्वै हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥ 

आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं। 

हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥ 

तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥ 

सूरदास ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥ 

माँ यशोदा की बात सुनकर श्रीकृष्ण की क्या प्रतिक्रिया हुई? 

Solution 12

माँ यशोदा की बात सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं माता तुझको मेरी सौगन्ध। तुम मुझे अभी ब्याहने चलो। 

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