EVERGREEN PUBLICATION Solutions for Class 9 Hindi Chapter 10 - Matru Mandir Ki Or [Poem]

Chapter 10 - Matr Mandir Ki Or [Poem] Exercise प्रश्न-अभ्यास

Question 1

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश, 

चलू उनको बहलाऊँ आज। 

बताकर अपना सुख-दुख उसे 

हृदय का भार हटाऊँ आज।। 

चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ 

नयन-जल से नहलाऊँ आज 

मातृ मंदिर में मैंने कहा.... 

चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।। 

किंतु यह हुआ अचानक ध्यान, 

दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान 

मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग 

तुम्हीं बतला दो हे भगवान।। 

किसका हृदय व्यथित है? 

Solution 1

कवयित्री का हृदय व्यथित है। 

Question 2

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,

चलू उनको बहलाऊँ आज। 

बताकर अपना सुख-दुख उसे 

हृदय का भार हटाऊँ आज।। 

चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ 

नयन-जल से नहलाऊँ आज 

मातृ मंदिर में मैंने कहा.... 

चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।। 

किंतु यह हुआ अचानक ध्यान, 

दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान 

मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग 

तुम्हीं बतला दो हे भगवान।। 

कवयित्री अपनी व्यथा को दूर करने के लिए क्या करना चाहती है? 

Solution 2

कवयित्री अपनी व्यथा को दूर करने के लिए मातृ मंदिर जाना चाहती है 

Question 3

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,

चलू उनको बहलाऊँ आज। 

बताकर अपना सुख-दुख उसे 

हृदय का भार हटाऊँ आज।। 

चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ 

नयन-जल से नहलाऊँ आज 

मातृ मंदिर में मैंने कहा.... 

चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।। 

किंतु यह हुआ अचानक ध्यान, 

दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान 

मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग 

तुम्हीं बतला दो हे भगवान।। 

मातृ मंदिर का मार्ग कैसा है? 

Solution 3

मातृ मंदिर का मार्ग दुर्गम है। 

Question 4

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश, 

चलू उनको बहलाऊँ आज। 

बताकर अपना सुख-दुख उसे 

हृदय का भार हटाऊँ आज।। 

चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ 

नयन-जल से नहलाऊँ आज 

मातृ मंदिर में मैंने कहा.... 

चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।। 

किंतु यह हुआ अचानक ध्यान, 

दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान 

मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग 

तुम्हीं बतला दो हे भगवान।। 

शब्दार्थ लिखिए - 

व्यथित, नयन-जल, दुर्गम 

Solution 4

व्यथित - दुखी 

नयन-जल - आँसू 

दुर्गम - जहाँ जाना कठिन हो 

Question 5

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मार्ग के बाधक पहरेदार 

सुना है ऊँचे से सोपान 

फिसलते हैं ये दुर्बल पैर 

चढ़ा दो मुझको हे भगवान।। 

अहा ! वे जगमग-जगमग जगी 

ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ। 

शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 

भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?

सुनाई पड़ता है कल-गान 

मिला दूँ मैं भी अपनी तान। 

शीघ्रता करो मुझे ले चलो ,

मातृ मंदिर में हे भगवान।। 

मार्ग के बाधक कौन है? 

Solution 5

मार्ग के बाधक पहरेदार है। 

Question 6

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मार्ग के बाधक पहरेदार 

सुना है ऊँचे से सोपान 

फिसलते हैं ये दुर्बल पैर 

चढ़ा दो मुझको हे भगवान।। 

अहा ! वे जगमग-जगमग जगी 

ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ। 

शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 

भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?

सुनाई पड़ता है कल-गान 

मिला दूँ मैं भी अपनी तान। 

शीघ्रता करो मुझे ले चलो,

मातृ मंदिर में हे भगवान।। 

कवयित्री भगवान से सहायता क्यों माँग रही है? 

Solution 6

कवयित्री के पैर दुर्बल हैं और वो ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ने में असमर्थ से इसलिए वह भगवान से सहायता माँग रही है। 

Question 7

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मार्ग के बाधक पहरेदार 

सुना है ऊँचे से सोपान 

फिसलते हैं ये दुर्बल पैर 

चढ़ा दो मुझको हे भगवान।। 

अहा ! वे जगमग-जगमग जगी 

ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ। 

शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 

भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?

सुनाई पड़ता है कल-गान 

मिला दूँ मैं भी अपनी तान। 

शीघ्रता करो मुझे ले चलो,

मातृ मंदिर में हे भगवान।। 

'अहा ! वे जगमग-जगमग जगी, ज्योतियाँ दिख रही हैं वहाँ।' - आशय स्पष्ट कीजिए। 

Solution 7

कवियित्री को माँ के मंदिर में जगमगाते दीपों का ज्योति पुंज दिखाई दे रहा है।  

Question 8

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

मार्ग के बाधक पहरेदार 

सुना है ऊँचे से सोपान 

फिसलते हैं ये दुर्बल पैर 

चढ़ा दो मुझको हे भगवान।। 

अहा ! वे जगमग-जगमग जगी 

ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ। 

शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 

भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?

सुनाई पड़ता है कल-गान 

मिला दूँ मैं भी अपनी तान। 

शीघ्रता करो मुझे ले चलो,

मातृ मंदिर में हे भगवान।। 

शब्दार्थ लिखिए - 

सोपान, शीघ्रता, दुर्बल,  

Solution 8

सोपान - सीढ़ियाँ  

शीघ्रता - जल्दी  

दुर्बल - कमजोर 

Question 9

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ। 

देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति। 

आह ! वह मीठी-सी मुसकान 

जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।

उसे भी आती होगी याद?

उसे, हाँ आती होगी याद।

नहीं तो रूठूँगी मैं आज 

सुनाऊँगी उसको फरियाद। 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

कवयित्री क्यों जल्दी से आगे बढ़ना चाहती है? 

Solution 9

कवियित्री को माँ के मंदिर में जगमगाते दीपों का ज्योति पुंज दिखाई दे रहा है तथा वाद्य भी सुनाई दे रहे है इसलिए वे मातृ भूमि के चरणों में जाना चाहती है। 

Question 10

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ। 

देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति। 

आह ! वह मीठी-सी मुसकान 

जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।

उसे भी आती होगी याद?

उसे, हाँ आती होगी याद।

नहीं तो रूठूँगी मैं आज 

सुनाऊँगी उसको फरियाद। 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

कवयित्री माँ को क्या सुनाना चाहती है? 

Solution 10

कवयित्री माँ को फरियाद सुनाना चाहती है। 

Question 11

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ। 

देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति। 

आह ! वह मीठी-सी मुसकान 

जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।

उसे भी आती होगी याद?

उसे, हाँ आती होगी याद।

नहीं तो रूठूँगी मैं आज 

सुनाऊँगी उसको फरियाद। 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

कहाँ से पुकार हो रही है? 

Solution 11

मातृ-वेदी पर से पुकार हो रही है। 

Question 12

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ। 

देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति। 

आह ! वह मीठी-सी मुसकान 

जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।

उसे भी आती होगी याद?

उसे, हाँ आती होगी याद।

नहीं तो रूठूँगी मैं आज 

सुनाऊँगी उसको फरियाद। 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

शब्दार्थ लिखिए - 

स्फूर्ति, फरियाद 

Solution 12

स्फूर्ति - उत्तेजना  

फरियाद - याचना  

Question 13

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

सुनूँगी माता की आवाज़ 

रहूँगी मरने को तैयार 

कभी भी उस वेदी पर देव,

न होने दूँगी अत्याचार। 

न होने दूँगी अत्याचार 

चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।

मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान। 

'कलेजा माँ का, मैं संतान करेगी दोषों पर अभिमान।' - का आशय स्पष्ट कीजिए।

Solution 13

कवयित्री कहती है कि माँ का हृदय उदार होता है वह अपने संतान के दोषों पर ध्यान नहीं देती। उसे अपने संतान पर गर्व होता है। 

Question 14

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

सुनूँगी माता की आवाज़ 

रहूँगी मरने को तैयार 

कभी भी उस वेदी पर देव,

न होने दूँगी अत्याचार। 

न होने दूँगी अत्याचार 

चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।

मातृ-मंदिर में हुई पुकार,चढ़ा दो मुझको हे भगवान। 

कवयित्री किसके लिए तैयार है? 

Solution 14

कवयित्री मरने के लिए तैयार है। 

Question 15

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

सुनूँगी माता की आवाज़ 

रहूँगी मरने को तैयार 

कभी भी उस वेदी पर देव,

न होने दूँगी अत्याचार। 

न होने दूँगी अत्याचार 

चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।

मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान। 

कवयित्री किस पथ पर बढ़ना चाहती है? 

Solution 15

कवयित्री मातृभूमि की रक्षा में बलिदान के पथ पर बढ़ना चाहती है। 

Question 16

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

कलेजा माँ का, मैं संतान

करेगी दोषों पर अभिमान। 

मातृ-वेदी पर हुई पुकार,

चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।

सुनूँगी माता की आवाज़ 

रहूँगी मरने को तैयार 

कभी भी उस वेदी पर देव,

न होने दूँगी अत्याचार। 

न होने दूँगी अत्याचार 

चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।

मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान। 

शब्दार्थ लिखिए - 

अत्याचार, मातृ-मंदिर 

Solution 16

अत्याचार - जुल्म  

मातृ-मंदिर - माता की मंदिर जिस मंदिर में विराजमान है