EVERGREEN PUBLICATION Solutions for Class 10 Hindi Chapter 2 - Giridhar Ki Kunadliya [Poem]

Chapter 2 - Giridhar Ki Kunadliya [Poem] Exercise प्रश्न-अभ्यास

Question 1

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग। 

गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग।।

तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे। 

दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै।।

कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी। 

सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।। 

कमरी थोरे दाम की, बहुतै आवै काम। 

खासा मलमल वाफ्ता, उनकर राखै मान॥

उनकर राखै मान, बँद जहँ आड़े आवै। 

बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै॥

कह 'गिरिधर कविराय', मिलत है थोरे दमरी। 

सब दिन राखै साथ, बड़ी मर्यादा कमरी॥ 

लाठी से क्या-क्या लाभ होते हैं? 

Solution 1

लाठी संकट के समय हमारी सहायता करती है। गहरी नदी और नाले को पार करते समय मददगार साबित होती है। यदि कोई कुत्ता हमारे ऊपर झपटे तो लाठी से हम अपना बचाव कर सकते हैं। अगर हमें दुश्मन धमकाने की कोशिश करे तो लाठी के द्‌वारा हम अपना बचाव कर सकते हैं। लाठी गहराई मापने के काम आती है। 

Question 2

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग। 

गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग।।

तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे। 

दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै।।

कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी। 

सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।। 

कमरी थोरे दाम की, बहुतै आवै काम। 

खासा मलमल वाफ्ता, उनकर राखै मान॥

उनकर राखै मान, बँद जहँ आड़े आवै। 

बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै॥

कह 'गिरिधर कविराय', मिलत है थोरे दमरी। 

सब दिन राखै साथ, बड़ी मर्यादा कमरी॥ 

'बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै' - पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। 

Solution 2

इस पंक्ति का भाव यह है कि कंबल को बाँधकर उसकी छोटी-सी गठरी बनाकर अपने पास रख सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर रात में उसे बिछाकर सो सकते हैं। 

Question 3

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग। 

गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग।।

तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे। 

दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै।।

कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी। 

सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।। 

कमरी थोरे दाम की, बहुतै आवै काम। 

खासा मलमल वाफ्ता, उनकर राखै मान॥

उनकर राखै मान, बँद जहँ आड़े आवै। 

बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै॥

कह 'गिरिधर कविराय', मिलत है थोरे दमरी। 

सब दिन राखै साथ, बड़ी मर्यादा कमरी॥ 

कमरी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है? 

Solution 3

कंबल (कमरी) बहुत ही सस्ते दामों में मिलता है। यह हमारे ओढ़ने तथा बिछाने के काम आता है। कंबल को बाँधकर उसकी छोटी-सी गठरी बनाकर अपने पास रख सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर रात में उसे बिछाकर सो सकते हैं। 

Question 4

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग। 

गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग।।

तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे। 

दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै।।

कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी। 

सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी।। 

कमरी थोरे दाम की, बहुतै आवै काम। 

खासा मलमल वाफ्ता, उनकर राखै मान॥

उनकर राखै मान, बँद जहँ आड़े आवै। 

बकुचा बाँधे मोट, राति को झारि बिछावै॥

कह 'गिरिधर कविराय', मिलत है थोरे दमरी। 

सब दिन राखै साथ, बड़ी मर्यादा कमरी॥ 

शब्दार्थ लिखिए - कमरी, बकुचा, मोट, दमरी 

Solution 4

 

शब्द 

अर्थ 

कमरी

काला कंबल

बकुचा

छोटी गठरी

मोट

गठरी

दमरी

दाम, मूल्य

 

Question 5

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय। 

जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥ 

शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन। 

दोऊ के एक रंग, काग सब भये अपावन॥ 

कह गिरिधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के। 

बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥ 

साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार। 

जब लग पैसा गाँठ में, तब लग ताको यार॥ 

तब लग ताको यार, यार संग ही संग डोले। 

पैसा रहे न पास, यार मुख से नहिं बोले॥ 

कह गिरिधर कविराय जगत यहि लेखा भाई। 

करत बेगरजी प्रीति, यार बिरला कोई साँई॥ 

'गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय' - पंक्ति का भावार्थ लिखिए। 

Solution 5

प्रस्तुत पंक्ति में गिरिधर कविराय ने मनुष्य के आंतरिक गुणों की चर्चा की है। गुणी व्यक्ति को हजारों लोग स्वीकार करने को तैयार रहते हैं लेकिन बिना गुणों के समाज में उसकी कोई मह्त्ता नहीं। इसलिए व्यक्ति को अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए। 

Question 6

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय। 

जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥ 

शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन। 

दोऊ के एक रंग, काग सब भये अपावन॥ 

कह गिरिधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के। 

बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥ 

साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार। 

जब लग पैसा गाँठ में, तब लग ताको यार॥ 

तब लग ताको यार, यार संग ही संग डोले। 

पैसा रहे न पास, यार मुख से नहिं बोले॥ 

कह गिरिधर कविराय जगत यहि लेखा भाई। 

करत बेगरजी प्रीति, यार बिरला कोई साँई॥ 

कौए और कोयल के उदाहरण द्वारा कवि क्या स्पष्ट करते हैं? 

Solution 6

कौए और कोयल के उदाहरण द्वारा कवि कहते है कि जिस प्रकार कौवा और कोयल रूप-रंग में समान होते हैं किन्तु दोनों की वाणी में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। कोयल की वाणी मधुर होने के कारण वह सबको प्रिय है। वहीं दूसरी ओर कौवा अपनी कर्कश वाणी के कारण सभी को अप्रिय है। अत: कवि कहते हैं कि बिना गुणों के समाज में व्यक्ति का कोई नहीं। इसलिए हमें अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए। 

Question 7

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय। 

जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥ 

शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन। 

दोऊ के एक रंग, काग सब भये अपावन॥ 

कह गिरिधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के। 

बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥ 

साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार। 

जब लग पैसा गाँठ में, तब लग ताको यार॥ 

तब लग ताको यार, यार संग ही संग डोले। 

पैसा रहे न पास, यार मुख से नहिं बोले॥ 

कह गिरिधर कविराय जगत यहि लेखा भाई। 

करत बेगरजी प्रीति, यार बिरला कोई साँई॥ 

संसार में किस प्रकार का व्यवहार प्रचलित है? 

Solution 7

कवि कहते हैं कि संसार में बिना स्वार्थ के कोई किसी का सगा-संबंधी नहीं होता। सब अपने मतलब के लिए ही व्यवहार रखते हैं। अत:इस संसार में मतलब का व्यवहार प्रचलित है। 

Question 8

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

गुन के गाहक सहस, नर बिन गुन लहै न कोय। 

जैसे कागा कोकिला, शब्द सुनै सब कोय॥ 

शब्द सुनै सब कोय, कोकिला सबै सुहावन। 

दोऊ के एक रंग, काग सब भये अपावन॥ 

कह गिरिधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के। 

बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥ 

साँई सब संसार में, मतलब का व्यवहार। 

जब लग पैसा गाँठ में, तब लग ताको यार॥ 

तब लग ताको यार, यार संग ही संग डोले। 

पैसा रहे न पास, यार मुख से नहिं बोले॥ 

कह गिरिधर कविराय जगत यहि लेखा भाई। 

करत बेगरजी प्रीति, यार बिरला कोई साँई॥ 

शब्दार्थ लिखिए - 

काग, बेगरजी, विरला, सहस 

Solution 8

 

शब्द 

अर्थ 

काग

कौवा

बेगरजी

नि:स्वार्थ

विरला

बहुत कम मिलनेवाला

सहस

हजार

 

Question 9

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

रहिए लटपट काटि दिन, बरु घामे माँ सोय। 

छाँह न बाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय॥ 

जो तरु पतरो होय, एक दिन धोखा देहैं। 

जा दिन बहै बयारि, टूटि तब जर से जैहैं॥ 

कह गिरिधर कविराय छाँह मोटे की गहिए। 

पाती सब झरि जायँ, तऊ छाया में रहिए॥ 

पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। 

दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥ 

यही सयानो काम, राम को सुमिरन कीजै। 

पर-स्वारथ के काज, शीश आगे धर दीजै॥ 

कह गिरिधर कविराय, बड़ेन की याही बानी। 

चलिए चाल सुचाल, राखिए अपना पानी॥ 

राजा के दरबार में, जैये समया पाय। 

साँई तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय उठाय॥ 

जहँ कोउ देय उठाय, बोल अनबोले रहिए। 

हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए॥ 

कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा। 

अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखैहैं राजा॥ 

कैसे पेड़ की छाया में रहना चाहिए और कैसे पेड़ की छाया में नहीं? 

Solution 9

कवि के अनुसार हमें हमें सदैव मोटे और पुराने पेड़ों की छाया में आराम करना चाहिए क्योंकि उसके पत्ते झड़ जाने के बावज़ूद भी वह हमें शीतल छाया प्रदान करते हैं। हमें पतले पेड़ की छाया में कभी नहीं बैठना चाहिए क्योंकि वह आँधी-तूफ़ान के आने पर टूट कर हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं। 

Question 10

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

रहिए लटपट काटि दिन, बरु घामे माँ सोय। 

छाँह न बाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय॥ 

जो तरु पतरो होय, एक दिन धोखा देहैं। 

जा दिन बहै बयारि, टूटि तब जर से जैहैं॥ 

कह गिरिधर कविराय छाँह मोटे की गहिए। 

पाती सब झरि जायँ, तऊ छाया में रहिए॥ 

पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। 

दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥ 

यही सयानो काम, राम को सुमिरन कीजै। 

पर-स्वारथ के काज, शीश आगे धर दीजै॥ 

कह गिरिधर कविराय, बड़ेन की याही बानी। 

चलिए चाल सुचाल, राखिए अपना पानी॥ 

राजा के दरबार में, जैये समया पाय। 

साँई तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय उठाय॥ 

जहँ कोउ देय उठाय, बोल अनबोले रहिए। 

हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए॥ 

कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा। 

अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखैहैं राजा॥ 

'पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥'- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। 

Solution 10

उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि जिस प्रकार नाव में पानी भरने से नाव डूबने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में हम दोनों हाथ से नाव का पानी बाहर फेंकने लगते है। ठीक वैसे ही घर में धन बढ़ जाने पर हमें दोनों हाथों से दान करना चाहिए। 

Question 11

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

रहिए लटपट काटि दिन, बरु घामे माँ सोय। 

छाँह न बाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय॥ 

जो तरु पतरो होय, एक दिन धोखा देहैं। 

जा दिन बहै बयारि, टूटि तब जर से जैहैं॥ 

कह गिरिधर कविराय छाँह मोटे की गहिए। 

पाती सब झरि जायँ, तऊ छाया में रहिए॥ 

पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। 

दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥ 

यही सयानो काम, राम को सुमिरन कीजै। 

पर-स्वारथ के काज, शीश आगे धर दीजै॥ 

कह गिरिधर कविराय, बड़ेन की याही बानी। 

चलिए चाल सुचाल, राखिए अपना पानी॥ 

राजा के दरबार में, जैये समया पाय। 

साँई तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय उठाय॥ 

जहँ कोउ देय उठाय, बोल अनबोले रहिए। 

हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए॥ 

कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा। 

अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखैहैं राजा॥ 

कवि कैसे स्थान पर न बैठने की सलाह देते हैं? 

Solution 11

कवि हमें किसी स्थान पर सोच समझकर बैठने की सलाह देते है वे कहते है कि हमें ऐसे स्थान पर नहीं बैठना चाहिए जहाँ से किसी के द्वारा उठाए जाने का अंदेशा हो। 

Question 12

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 

रहिए लटपट काटि दिन, बरु घामे माँ सोय। 

छाँह न बाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय॥ 

जो तरु पतरो होय, एक दिन धोखा देहैं। 

जा दिन बहै बयारि, टूटि तब जर से जैहैं॥ 

कह गिरिधर कविराय छाँह मोटे की गहिए। 

पाती सब झरि जायँ, तऊ छाया में रहिए॥ 

पानी बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़े दाम। 

दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम॥ 

यही सयानो काम, राम को सुमिरन कीजै। 

पर-स्वारथ के काज, शीश आगे धर दीजै॥ 

कह गिरिधर कविराय, बड़ेन की याही बानी। 

चलिए चाल सुचाल, राखिए अपना पानी॥ 

राजा के दरबार में, जैये समया पाय। 

साँई तहाँ न बैठिये, जहँ कोउ देय उठाय॥ 

जहँ कोउ देय उठाय, बोल अनबोले रहिए। 

हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए॥ 

कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा। 

अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखैहैं राजा॥ 

शब्दार्थ लिखिए - बयारि, घाम, जर, दाय 

Solution 12

शब्द

अर्थ 

बयारि 

हवा 

घाम 

धूप 

जर 

जड़ 

दाय 

रुपया-पैसा