Surdas ji vatsalya ras ka kona kona jhank daale the. iss kathan par prakash daliye.
 

Asked by neeraj | 19th May, 2015, 05:05: PM

Expert Answer:

जब किसी बालक को देखकर या सुनकर उसके प्रति मन में एक सहज आकर्षण या बाल-रति का भाव उमड़ता हो वहाँ वात्सल्य रस होता है। इसकी झलक हमें सूर के काव्यों में देखने मिलती है।महाकवि सूर को बाल-प्रकृति तथा बालसुलभ चित्रणों की दृष्टि से विश्व में अद्वितीय माना गया है। उनके वात्सल्य वर्णन का कोई साम्य नहीं, वह अनूठा और बेजोड है। बालकों की प्रवृति और मनोविज्ञान का जितना सूक्ष्म व स्वाभाविक वर्णन सूरदास जी ने किया है वह हिन्दी के किसी अन्य कवि या अन्य भाषाओं के किसी कवि ने नहीं किया है। शैशव से लेकर कौमार अवस्था तक के क्रम से लगे न जाने कितने चित्र सूर के काव्य में वर्णित हैं इसी कारण हम कह सकते हैं कि कवि सूरदास ने वात्सल्य का कोना-कोना झाँक रखा था।

Answered by Beena Thapliyal | 20th May, 2015, 10:42: AM

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