"Ladka ladki ek saman " ke paksh (for the motion) mein kripya ek anooched batein. (500-600)

Asked by Apoorva | 25th Dec, 2017, 10:05: PM

Expert Answer:

लड़का लड़की एक समान
आज देश में लड़का लड़की एक समान के नारे हर जगह सुनाई पड़ते है।परंतु वस्तुस्थिति कुछ और है।शहरों और गाँवों का तुलनात्मक अध्ययन करें तो हम देखते हैं कि आज भी गाँवों में लड़की को लड़कों के समान दर्जा प्राप्त नहीं है। आज भी बेटी के जन्म पर लोग दुखी होते हैं।उन्हें हर प्रकार का भेदभाव झेलना पड़ता है।शहर में जहाँ लड़कियों को काम करने की आज़ादी तो मिली है परंतु उसकी यह आज़ादी पुरुष की हाँ या ना पर ही आधारित होती है।इस प्रकार यदि हम लड़का और लड़की को एक समान चाहते हैं तो हमें उन्हें हर प्रकार की आज़ादी (वैचारिक,सामाजिक,शैक्षणिक आदि) देनी होगी। तभी महिलाएँ सही अर्थों में पुरुष के साथ कंधें से कंधा मिलाकर चल पाएँगी।

Answered by Beena Thapliyal | 26th Dec, 2017, 09:12: AM

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